बीमा दावे में देरी से दावा अमान्य नहीं: राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग
राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने चोलामंडलम जनरल इंश्योरेंस की पुनरीक्षण याचिका को खारिज करते हुए यह स्पष्ट किया कि यदि चोरी के संबंध में पुलिस को तत्काल सूचना दी जाती है, तो बीमाकर्ता को देरी से सूचित करने मात्र से दावा अमान्य नहीं होता।
पूरा मामला
शिकायतकर्ता ने एक नया वाहन खरीदा और उसका बीमा चोलामंडलम इंश्योरेंस से करवाया। कवर अवधि के दौरान वाहन चोरी हो गया। शिकायतकर्ता ने उसी दिन पुलिस कंट्रोल रूम में फोन कर सूचना दी और बाद में FIR भी दर्ज कराई। बीमाकर्ता को सूचना देने में देरी हुई लेकिन अंततः दावा प्रस्तुत किया गया।
बीमा कंपनी ने दावा यह कहकर खारिज कर दिया कि सूचना देने में तीन महीने से अधिक की देरी हुई, जो पॉलिसी की शर्तों का उल्लंघन है।
विधिक कार्यवाही
शिकायतकर्ता ने पहले जिला आयोग का रुख किया, जिसने बीमा कंपनी को ₹7,81,850 + 9% ब्याज और ₹2,200 मुकदमेबाजी खर्च देने का निर्देश दिया।
राज्य आयोग ने भी जिला आयोग के आदेश की पुष्टि की। बीमाकर्ता इससे असंतुष्ट होकर राष्ट्रीय आयोग पहुँचा।
बीमा कंपनी के तर्क
- चोरी की सूचना तीन महीने बाद दी गई, जो अनुबंध की शर्तों के विरुद्ध है।
- दावा खारिज करना नीति अनुरूप और वैध था।
- सेवा में कोई कमी नहीं थी।
राष्ट्रीय आयोग की टिप्पणी
आयोग ने कहा कि मुख्य प्रश्न यह है कि क्या सूचना देने में देरी से दावा अमान्य हो सकता है। आयोग ने माना कि शिकायतकर्ता ने पुलिस को समय रहते सूचना दी थी और FIR भी उचित समय पर दर्ज हुई।
हालांकि बीमा कंपनी को सूचना 107 दिन बाद मिली, लेकिन गुरशिंदर सिंह बनाम श्रीराम इंश्योरेंस (2020) 11 SCC 612 में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का हवाला देते हुए आयोग ने कहा कि पुलिस को तत्काल सूचना महत्वपूर्ण है, न कि बीमाकर्ता को देरी से सूचना देना।
आयोग ने यह भी कहा कि:
- जिला व राज्य आयोगों ने तथ्यों के आधार पर न्यायसंगत निर्णय दिया।
- पुनरीक्षण क्षेत्राधिकार सीमित है और कानून की त्रुटि या गंभीर अनियमितता नहीं पाई गई।
अन्य संदर्भित मामले:
- रूबी (चंद्रा) दत्ता बनाम यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस (2011) 11 SCC 269
- सुनील कुमार मैती बनाम SBI, Civil Appeal No. 432/2022
- राजीव शुक्ला बनाम गोल्ड रश सेल्स एंड सर्विसेज (2022) 9 SCC 31
निष्कर्ष: पुनरीक्षण याचिका को बिना किसी लागत के खारिज कर दिया गया और उपभोक्ता अधिकारों को एक बार फिर बल मिला।
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– अनुपमा
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लेखिका: अनुपमा सिंह | विधिक ब्लॉगर
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